राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025
पाठ्यक्रम: GS2 / शासन एवं राजनीति
संदर्भ
- पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार (NPA) 2025 के विजेताओं की घोषणा की है, जिसमें पूरे भारत से 42 पंचायतों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार
- परिचय: यह पुरस्कार पंचायती राज मंत्रालय द्वारा उच्च प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पहचान और प्रोत्साहन देने हेतु प्रदान किया जाता है।
- उद्देश्य: स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी संघवाद के माध्यम से सुशासन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति हेतु प्रेरित करना।
- क्रियान्वयन ढाँचा: पुरस्कार “पंचायतों का प्रोत्साहन (IoP)” योजना के अंतर्गत दिए जाते हैं, जो राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) का एक घटक है।
- वित्तीय प्रोत्साहन: विजेता पंचायतों को ₹50 लाख से ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- राज्यवार प्रदर्शन: कर्नाटक ने सर्वाधिक 6 पुरस्कार प्राप्त किए, इसके बाद आंध्र प्रदेश और ओडिशा ने 5-5 पुरस्कार हासिल किए।
पुरस्कार की श्रेणियाँ
- दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार (DDUPSVP): ग्राम पंचायतों को LSDGs के नौ विषयों पर प्रदर्शन के आधार पर सम्मानित किया जाता है।
- नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार (NDSPSVP): सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर प्रदान किया जाता है।
स्रोत: PIB
ब्लू हेलमेट
पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- दक्षिण सूडान में UN मिशन (UNMISS) के तहत सेवा कर रहे 565 भारतीय ब्लू हेलमेट्स को UN मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया।
ब्लू हेलमेट
- ये सैन्यकर्मी, पुलिस अधिकारी और नागरिक विशेषज्ञ होते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में कार्यरत रहते हैं।
- मान्यता प्राप्त कार्य:
- नागरिकों की सुरक्षा हेतु गश्त,
- सामुदायिक सहभागिता,
- पशु चिकित्सा शिविर,
- महिलाओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण,
- लैंगिक हिंसा से मुकाबला,
- मानवीय पहुँच में सुधार।
- भारत का योगदान:
- नेपाल के बाद भारत UN शांति अभियानों में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
- वर्तमान में भारत 4,200 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मी भेज रहा है, जिनमें 155 महिलाएँ शामिल हैं।
- अब तक लगभग 180 भारतीय शांति सैनिकों ने ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति दी है, जो सभी देशों में सर्वाधिक है।
स्रोत: TOI
नवाचार मंत्र पहल
पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था
समाचार में
- नवाचार मंत्र पहल का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री द्वारा IIT दिल्ली में किया गया।
नवाचार मंत्र पहल
- यह राष्ट्रीय कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा शुरू किया गया है और NIESBUD के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण भारत से उत्पन्न नवाचारों की पहचान, मार्गदर्शन एवं विस्तार करना है।
मुख्य विशेषताएँ
- लक्षित जनसंख्या: 18 से 55 वर्ष आयु के भारतीय नागरिक, विशेषकर आकांक्षी जिलों और ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों से।
- पात्रता: विचार मान्यता या प्रारंभिक प्रोटोटाइप चरण में होना चाहिए; पंजीकृत कंपनी या तैयार उत्पाद आवश्यक नहीं।
- प्राथमिक क्षेत्र: एग्रीटेक, हेल्थटेक एवं वेलनेस, एडटेक, जलवायु कार्रवाई, ग्रामीण वाणिज्य और MSME सशक्तिकरण।
- सहायता तंत्र: चयनित प्रतिभागियों को 1-वर्षीय इनक्यूबेशन चक्र मिलता है, जिसमें मार्गदर्शन, नियामक अनुपालन, बौद्धिक संपदा संरचना और वित्त पोषण रोडमैप शामिल हैं।
स्रोत: DD News
₹10,000 करोड़ एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण कोष
पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) मूल्य स्थिरीकरण सहायता प्रदान करने हेतु अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए ₹10,000 करोड़ तक की एकमुश्त बजटीय सहायता को स्वीकृति दी है।
परिचय
- पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल एवं जेट ईंधन की कीमतों में तीव्र वृद्धि हुई है।
- ATF, एयरलाइनों की परिचालन लागत का लगभग 35–40% हिस्सा होता है, जिससे एयरलाइंस ईंधन मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
- इस योजना का उद्देश्य असाधारण वैश्विक ईंधन बाजार अस्थिरता की अवधि में विमानन ईंधन की कीमतों में अधिक पूर्वानुमेयता और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
- यह योजना भारतीय एयरलाइनों के घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों को शामिल करती है।
स्रोत: AIR
भारत में E85 ईंधन अपनाना
पाठ्यक्रम: GS3/ ऊर्जा
संदर्भ
- केंद्र सरकार भारत में E85 ईंधन के किफायती अपनाने के लिए एक नीति ढाँचा तैयार करने पर विचार कर रही है।
E85 ईंधन क्या है?
- E85 एक ईंधन मिश्रण है जिसमें 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल शामिल होता है।
- इसका उपयोग विशेष रूप से डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) में किया जा सकता है, जो विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर कार्य करने में सक्षम होते हैं।
- इन वाहनों में संशोधित इंजन एवं ईंधन प्रणाली होती है, जो विभिन्न ईंधन संरचनाओं के अनुसार स्वचालित रूप से समायोजित हो जाती है।
भारत में E85 को प्रोत्साहन दिए जाने का कारण
- ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि: इथेनॉल का अधिक उपयोग भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम कर सकता है।
- आयात बिल में कमी: यदि 2026–27 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान पेट्रोल वाहन बिक्री का केवल 1% हिस्सा E85 में परिवर्तित होता है, तो भारत लगभग ₹195 करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है।
- इससे कच्चे तेल के आयात में लगभग 0.28 लाख मीट्रिक टन (LMT) की कमी हो सकती है।
- कृषक एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन: E85 के बढ़ते उपयोग से 4 करोड़ लीटर से अधिक इथेनॉल की मांग उत्पन्न हो सकती है।
- लगभग ₹266 करोड़ इथेनॉल डिस्टिलर्स को भुगतान किए जाने का अनुमान है।
- लगभग ₹160 करोड़ सीधे किसानों को इथेनॉल फीडस्टॉक (जैसे गन्ना एवं मक्का) की बढ़ती मांग के माध्यम से प्राप्त हो सकते हैं।
- पर्यावरणीय लाभ: अनुमानित स्तर पर E85 के उपयोग से लगभग 0.86 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में शुद्ध कमी हो सकती है।
इथेनॉल क्या है?
- इथेनॉल 99.9% शुद्ध अल्कोहल है जिसे पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जा सकता है। इसका उत्पादन उच्च स्टार्च सामग्री वाले गन्ना, मक्का, गेहूँ आदि से किया जा सकता है।
- अल्कोहल का उत्पादन यीस्ट द्वारा शर्करा के किण्वन के माध्यम से होता है। गन्ने के रस या मोलासेस में शर्करा सुक्रोज के रूप में होती है, जो ग्लूकोज और फ्रक्टोज में विखंडित होती है।
- अनाजों में स्टार्च होता है, जिसे पहले शर्करा में परिवर्तित किया जाता है, उसके पश्चात किण्वन, आसवन एवं निर्जलीकरण की प्रक्रियाओं के माध्यम से इथेनॉल प्राप्त किया जाता है।
इथेनॉल मिश्रण
- इथेनॉल मिश्रण का अर्थ पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिलाकर एक ऐसा ईंधन तैयार करना है, जिसका उपयोग आंतरिक दहन इंजनों में किया जा सके।
- मुख्य मिश्रण इस प्रकार हैं:
- E10: 10% इथेनॉल और 90% पेट्रोल का मिश्रण, जो व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- E15: 15% इथेनॉल और 85% पेट्रोल का मिश्रण।
- E85: 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल का उच्च इथेनॉल मिश्रण, जिसका उपयोग फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जाता है।
स्रोत: TH
S-400 वायु रक्षा प्रणाली
पाठ्यक्रम: GS3/ रक्षा
समाचार में
- भारत को रूस निर्मित S-400 वायु रक्षा प्रणाली का चौथा स्क्वाड्रन प्राप्त हुआ है, जिससे देश की लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमताएँ और अधिक सुदृढ़ हुई हैं।
परिचय
- यह आपूर्ति वर्ष 2018 में भारत और रूस के बीच हस्ताक्षरित 5.43 अरब डॉलर के समझौते का भाग है, जिसके अंतर्गत पाँच S-400 रेजिमेंटल प्रणालियों की खरीद की जानी है।
- मूल अनुबंध के अंतर्गत पाँचवाँ एवं अंतिम स्क्वाड्रन वर्ष 2027 तक प्राप्त होने की संभावना है।
S-400 के बारे में
- भारतीय सेवा में इसे “सुदर्शन चक्र” के नाम से भी जाना जाता है।
- यह विश्व की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में से एक है।
- यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक एवं नष्ट करने में सक्षम है, जिनमें लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें, ड्रोन एवं हवाई निगरानी प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
- इसकी मारक क्षमता 400 किमी तक तथा ऊँचाई क्षमता 30 किमी तक है।
- यह भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो पश्चिमी एवं उत्तरी सीमाओं पर तैनात है।
- यह आकाश (Akash) और MRSAM जैसी प्रणालियों के साथ मिलकर बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
क्या आप जानते हैं?
- S-400 ने ऑपरेशन सिंदूर (2025) के दौरान शत्रु के हवाई खतरों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- इसके प्रदर्शन के बाद सरकार ने पाँच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन की खरीद को स्वीकृति दी, जिससे भारत की प्रस्तावित कुल संख्या पाँच से बढ़कर दस स्क्वाड्रन हो जाएगी।
स्रोत: TH
लक्षद्वीप में नव-रिकॉर्डेड ‘पोटैटो पैच’ कोरल
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- लक्षद्वीप के कदमत द्वीप के दक्षिण-पूर्वी भाग में विशाल ‘पोटैटो कोरल’ पैच (कोरल कॉलोनी) की खोज/रिकॉर्ड दर्ज की गई है।
कोरल क्या हैं?
- कोरल अकशेरुकी जीव हैं, जो निडेरिया (Cnidaria) नामक बड़े जीव समूह से संबंधित होते हैं।
- कोरल का निर्माण छोटे, नरम जीवों जिन्हें पॉलीप्स कहा जाता है, के समूह से होता है।
- ये अपने चारों ओर सुरक्षा हेतु कैल्शियम कार्बोनेट का चूना-पत्थर जैसा कठोर बाह्य कंकाल स्रावित करते हैं।
- अतः कोरल रीफ लाखों सूक्ष्म पॉलीप्स द्वारा निर्मित विशाल कार्बोनेट संरचनाएँ होती हैं।
- आकृति: कोरल लाल से लेकर बैंगनी और नीले रंग तक पाए जाते हैं, लेकिन सामान्यतः ये भूरे और हरे रंग के शेड्स में अधिक दिखाई देते हैं।
- कोरल रंगीन इसलिए दिखाई देते हैं क्योंकि इनके अंदर ज़ूज़ैन्थेली (zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल पाए जाते हैं।
- कोरल रीफ के प्रकार: तीन प्रकार के कोरल रीफ होते हैं— फ्रिंजिंग रीफ, बैरियर रीफ और एटोल।
- फ्रिंजिंग रीफ तटरेखा के साथ बनते हैं, बैरियर रीफ खुले समुद्री जल में विकसित होते हैं, और एटोल गोलाकार रीफ होते हैं जो डूबे हुए ज्वालामुखियों के चारों ओर बनते हैं।
- भारत में कोरल रीफ क्षेत्र: कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप द्वीप समूह तथा मालवन।
- महत्व: कोरल रीफ समुद्री जैव विविधता के अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ये लगभग एक-चौथाई समुद्री जीवों को भोजन, आश्रय, विश्राम एवं प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं तथा नर्सरी व संरक्षण स्थल के रूप में कार्य करते हैं।
- ये वैश्विक स्तर पर 1 अरब से अधिक तटीय जनसंख्या को भोजन, आजीविका और मनोरंजन के माध्यम से समर्थन प्रदान करते हैं।
कोरल ब्लिचिंग
कोरल ब्लिचिंग तब होती है जब कोरल अपने ऊतकों में रहने वाले रंगीन सहजीवी शैवाल (zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं।- इसके कारण कोरल फीके पड़ जाते हैं और भूख तथा रोगों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।
- ब्लिच हुए कोरल तुरंत मरते नहीं हैं, लेकिन उनके पुनर्जीवन के लिए समुद्री तापमान का सामान्य/ठंडा होना आवश्यक होता है।
स्रोत: DTE
काजीरंगा में प्रथम बार पीले-गले वाले मार्टेन की रिकॉर्डिंग
पाठ्यक्रम: GS3/समाचार में प्रजातियाँ
संदर्भ
- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में प्रथम बार पीले-गले वाले मार्टेन की उपस्थिति की पुष्टि की गई है।
पीले-गले वाले मार्टेन के बारे में
- वैज्ञानिक नाम: मार्टेस फ्लेविगुला।
- यह मस्टेलिडे परिवार से संबंधित है, जिसमें ऊदबिलाव, बिज्जू और वूल्वरिन जैसे जीव शामिल होते हैं।
- यह खाद्य शृंखला में अपेक्षाकृत छोटा मांसाहारी है, जो शीर्ष शिकारी (जैसे बाघ और भालू) के नीचे स्थित होता है।
- यह दिन में सक्रिय और वृक्षों पर चढ़ने वाला मस्टेलिड है, जो बीजों के प्रसार में सहायता करता है तथा वन पुनर्जनन एवं पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाता है।

- यह हिमालय, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, कोरिया और रूस के कुछ भागों में पाया जाता है।
- भारत में यह हिमालयी क्षेत्र तथा पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम में पाया जाता है।
- IUCN स्थिति: कम चिंताजनक ।
- यह भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची II में संरक्षित है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- यह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में स्थित है।
- इसे 1908 में आरक्षित वन के रूप में स्थापित किया गया था और 1974 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- इसे 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ।
- यह भारतीय गैंडे (राइनोसिरोस यूनिकॉर्निस) का सबसे बड़ा आवास स्थल है।
स्रोत: TH
पद्मा बैराज
पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल
संदर्भ
बांग्लादेश ने पद्मा नदी पर एक बड़े नदी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट—पद्मा बैराज—को स्वकृति दी है, जो राजबाड़ी जिले में स्थित है।
परिचय
- यह परियोजना बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र की जल-प्रणाली को आंशिक रूप से पुनर्गठित करने का प्रयास है, जो लंबे समय से मौसमी जल प्रवाह में कमी के कारण सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है।
- इस बैराज की लंबाई 2.1 किलोमीटर होगी तथा इसमें 78 स्पिलवे गेट, अंडर-स्लूइस, नेविगेशन लॉक, मछली मार्ग और संबंधित तटबंध शामिल होंगे।
- बांग्लादेश के अनुसार, यह परियोजना देश के लगभग 37% भूभाग को प्रभावित करेगी तथा लगभग 2.88 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई में सहायक होगी।
पद्मा नदी के बारे में
- पद्मा नदी बांग्लादेश की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है।
- यह गंगा नदी की प्रमुख वितरिका है, जब गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
- पद्मा दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रवाहित हुए जमुना (निम्न ब्रह्मपुत्र) नदी से मिलती है और आगे मेघना नदी में मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
- यह विश्व के सबसे बड़े डेल्टा तंत्र—गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा—का एक प्रमुख हिस्सा है।
स्रोत: TH
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